अनुप्राप्तं तु तं दृष्ट्वा कैकेयी प्रोषितं सुतम् ।
उत्पपात तदा हृष्टा त्यक्त्वा सौवर्णमानसम् ॥
अनुप्राप्तं तु तं दृष्ट्वा कैकेयी प्रोषितं सुतम् ।
उत्पपात तदा हृष्टा त्यक्त्वा सौवर्णमानसम् ॥
अन्वयः
कैकेयी Kaikeyi, प्रोषितम् sent, तं सुतम् that son, अनुप्राप्तम् who had arrived, दृष्ट्वा having seen, तदा then, हृष्टा delighted, सौवर्णम् golden, आसनम् seat, त्वक्त्वा leaving, उत्पपात sprang up.M N Dutt
On seeing her son before her after his sojourn from home, Kaikeyi delighted, rose up from her golden seat.Summary
On seeing her son, who was sent away, presently arriving, the delighted Kaikeyi sprang up from her golden seat.पदच्छेदः
| अनुप्राप्तं | अनुप्राप्त (√अनुप्र-आप् + क्त, २.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तं | तद् (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| कैकेयी | कैकेयी (१.१) |
| प्रोषितं | प्रोषित (√प्र-वस् + क्त, २.१) |
| सुतम् | सुत (२.१) |
| उत्पपात | उत्पपात (√उत्-पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| हृष्टा | हृष्ट (√हृष् + क्त, १.१) |
| त्यक्त्वा | त्यक्त्वा (√त्यज् + क्त्वा) |
| सौवर्णमानसम् | सौवर्ण–मानस (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | नु | प्रा | प्तं | तु | तं | दृ | ष्ट्वा |
| कै | के | यी | प्रो | षि | तं | सु | तम् |
| उ | त्प | पा | त | त | दा | हृ | ष्टा |
| त्य | क्त्वा | सौ | व | र्ण | मा | न | सम् |