न ब्राह्मणधनं किंचिद्धृतं रामेण कस्यचित् ।
कश्चिन्नाढ्यो दरिद्रो वा तेनापापो विहिंसितः ।
न रामः परदारांश्च चक्षुर्भ्यामपि पश्यति ॥
न ब्राह्मणधनं किंचिद्धृतं रामेण कस्यचित् ।
कश्चिन्नाढ्यो दरिद्रो वा तेनापापो विहिंसितः ।
न रामः परदारांश्च चक्षुर्भ्यामपि पश्यति ॥
अन्वयः
रामेण by Rama, कस्यचित् some one's, ब्राह्मण धनम् wealth of brahmin, किञ्चित् even a little, न हृतम् was not seized, तेन by him, आढ्यः whether rich, दरिद्रो वा or poor अपापः innocent, कश्चित् even a little, न विहिंसितः was not harmed, रामः Rama, परदारान् wife of other man, चक्षुर्भ्याम् with the eyes, न पश्यति did not see.M N Dutt
Has Rāma deprived any Brāhmaṇa of his wealth? Or has he wronged any innocent person, whether rich or poor?Summary
I hope Rama did not seize the wealth of any brahmin nor did any harm to an innocent person, whether rich or poor.पदच्छेदः
| न | न (अव्ययः) |
| ब्राह्मणधनं | ब्राह्मण–धन (१.१) |
| किंचिद्धृतं | कश्चित् (१.१)–हृत (√हृ + क्त, १.१) |
| रामेण | राम (३.१) |
| कस्यचित् | कश्चित् (६.१) |
| कश्चिन् | कश्चित् (१.१) |
| नाढ्यो | न (अव्ययः)–आढ्य (१.१) |
| दरिद्रो | दरिद्र (१.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| तेनापापो | तद् (३.१)–अपाप (१.१) |
| विहिंसितः | विहिंसित (√वि-हिंस् + क्त, १.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| रामः | राम (१.१) |
| परदारांश् | पर–दार (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| चक्षुर्भ्याम् | चक्षुस् (३.२) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| पश्यति | पश्यति (√दृश् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | ब्रा | ह्म | ण | ध | नं | किं | चि | द्धृ | तं | रा | मे |
| ण | क | स्य | चित् | क | श्चि | न्ना | ढ्यो | द | रि | द्रो | वा |
| ते | ना | पा | पो | वि | हिं | सि | तः | न | रा | मः | प |
| र | दा | रां | श्च | च | क्षु | र्भ्या | म | पि | प | श्य | ति |