अन्वयः
पार्थिवात्मजः king's son, Bharata, पतिपुत्राभ्याम् of husband and son, विहीनाम् deprived of, कौशल्याम् Kausalya, एवम् in this way, आश्वासयन्नेव while appeasing, दुःखार्तः filled with grief, निपपात ह fell down at her feet.
Summary
While thus appeasing Kausalya deprived of her husband and son, Bharata, filled with grief, fell down at her feet.
पदच्छेदः
| विहीनां | विहीन (√वि-हा + क्त, २.१) |
| पतिपुत्राभ्यां | पति–पुत्र (३.२) |
| कौसल्यां | कौसल्या (२.१) |
| पार्थिवात्मजः | पार्थिव–आत्मज (१.१) |
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| आश्वासयन्न् | आश्वासयत् (√आ-श्वासय् + शतृ, १.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| दुःखार्तो | दुःख–आर्त (१.१) |
| निपपात | निपपात (√नि-पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वि | ही | नां | प | ति | पु | त्रा | भ्यां |
| कौ | स | ल्यां | पा | र्थि | वा | त्म | जः |
| ए | व | मा | श्व | स | य | न्ने | व |
| दुः | खा | र्तो | नि | प | पा | त | ह |