अन्वयः
विवर्णा turned pallid, मलिना sullied, कृशा emaciated, सा that Kausalya, सुमित्राम् to Sumitra, एवम् thus, उक्त्वा having uttered, वेपमाना trembling, विचेतना almost lifeless, भरतः Bharata, यत्र wherever, प्रतस्थे set out.
Summary
Having said so to Sumitra, Kausalya trembling and almost lifeless, emaciated, sullied and turned pallid set out for the place where Bharat was.
पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| सुमित्रां | सुमित्रा (२.१) |
| सा | तद् (१.१) |
| विवर्णा | विवर्ण (१.१) |
| मलिनाम्बरा | मलिन–अम्बर (१.१) |
| प्रतस्थे | प्रतस्थे (√प्र-स्था लिट् प्र.पु. एक.) |
| भरतो | भरत (१.१) |
| यत्र | यत्र (अव्ययः) |
| वेपमाना | वेपमान (√विप् + शानच्, १.१) |
| विचेतना | विचेतन (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | व | मु | क्त्वा | सु | मि | त्रां | सा |
| वि | व | र्णा | म | लि | ना | म्ब | रा |
| प्र | त | स्थे | भ | र | तो | य | त्र |
| वे | प | मा | ना | वि | चे | त | ना |