अन्वयः
सा मन्थरा that Manthara, कैकेय्याः Kaikeyi's, पादमूले at her feet, निपपात ह fell down, सुदुःखार्ता tormented with grief, निःश्वसन्ती heaving deep sighs, कृपणम् wretchedly, विललाप च lamented.
M N Dutt
Thereat, sighing hard in exceeding grief, Mantharā flung herself and Kaikeyi's feet, weeping piteously.
Summary
Manthara, tormented with grief, fell at the feet of Kaikeyi and began heaving deep sighs.
पदच्छेदः
| सा | तद् (१.१) |
| पादमूले | पाद–मूल (७.१) |
| कैकेय्या | कैकेयी (६.१) |
| मन्थरा | मन्थरा (१.१) |
| निपपात | निपपात (√नि-पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
| निःश्वसन्ती | निःश्वसत् (√निः-श्वस् + शतृ, १.१) |
| सुदुःखार्ता | सु (अव्ययः)–दुःख–आर्त (१.१) |
| कृपणं | कृपण (२.१) |
| विललाप | विललाप (√वि-लप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| सा | पा | द | मू | ले | कै | के | य्या |
| म | न्थ | रा | नि | प | पा | त | ह |
| निः | श्व | स | न्ती | सु | दुः | खा | र्ता |
| कृ | प | णं | वि | ल | ला | प | च |