पदच्छेदः
| विसर्पद्भिर् | विसर्पत् (√वि-सृप् + शतृ, ३.३) |
| इवाकाशे | इव (अव्ययः)–आकाश (७.१) |
| विटङ्काग्रविमानकैः | विटङ्क–अग्र–विमानक (३.३) |
| समुच्छ्रितैर् | समुच्छ्रित (√समुत्-श्रि + क्त, ३.३) |
| निवेशास् | निवेश (१.३) |
| ते | तद् (१.३) |
| बभुः | बभुः (√भा लिट् प्र.पु. बहु.) |
| शक्रपुरोपमाः | शक्र–पुर–उपम (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | स | र्प | द्भि | रि | वा | का | शे |
| वि | ट | ङ्का | ग्र | वि | मा | न | कैः |
| स | मु | च्छ्रि | तै | र्नि | वे | शा | स्ते |
| ब | भुः | श | क्र | पु | रो | प | माः |