अवृक्षेषु च देशेषु केचिद्वृक्षानरोपयन् ।
केचित्कुठारैष्टङ्कैश्च दात्रैश्छिन्दन्क्वचित्क्वचित् ॥
अवृक्षेषु च देशेषु केचिद्वृक्षानरोपयन् ।
केचित्कुठारैष्टङ्कैश्च दात्रैश्छिन्दन्क्वचित्क्वचित् ॥
अन्वयः
केचित् some of them, अवृक्षेषु where there were no trees, देशेषु in places, वृक्षान् saplings, अरोपयन् planted, केचित् some, क्वचित् क्वचित् here and there, कुठारैः with axes, टङ्कैश्च with hatchets, दात्रैः च with sickles, छिन्दन् severing.Summary
Some of them, planted saplings in places where there were none, while some others severed trees here and there with axes, hatchets and sickles.पदच्छेदः
| अवृक्षेषु | अवृक्ष (७.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| देशेषु | देश (७.३) |
| केचिद् | कश्चित् (१.३) |
| वृक्षान् | वृक्ष (२.३) |
| अरोपयन् | अरोपयन् (√रोपय् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| केचित् | कश्चित् (१.३) |
| कुठारैष् | कुठार (३.३) |
| टङ्कैश् | टङ्क (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| दात्रैश् | दात्र (३.३) |
| छिन्दन् | छिन्दन् (√छिद् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| क्वचित् | क्वचिद् (अव्ययः) |
| क्वचित् | क्वचिद् (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | वृ | क्षे | षु | च | दे | शे | षु |
| के | चि | द्वृ | क्षा | न | रो | प | यन् |
| के | चि | त्कु | ठा | रै | ष्ट | ङ्कै | श्च |
| दा | त्रै | श्छि | न्द | न्क्व | चि | त्क्व | चित् |