ततः समुत्थाय कुले कुले ते; राजन्यवैश्या वृषलाश्च विप्राः ।
अयूयुजन्नुष्ट्ररथान्खरांश्च; नागान्हयांश्चैव कुलप्रसूतान् ॥
ततः समुत्थाय कुले कुले ते; राजन्यवैश्या वृषलाश्च विप्राः ।
अयूयुजन्नुष्ट्ररथान्खरांश्च; नागान्हयांश्चैव कुलप्रसूतान् ॥
अन्वयः
ततः there after, कुले कुले in every household, ते those, राजन्यवैश्याः kshatriyas, vaisyas वृषलाश्च sudras, विप्राः brahmins, समुत्थाय after rising up, उष्ट्रखरान् camels and asses, रथांश्च chariots, कुलप्रसूतान् born in a good race, नागान् elephants, हयांश्चैव horses as well, अयूयुजन् harnessed.M N Dutt
Thereat rising, Rājanyas and Vaisyas, and Vņşalas; and Vipras in every house began to yoke camels and cars and mules and elephants and excellent steeds.Summary
Thereafter, men from every household, kshatriyas, vaisyas, sudras and brahmins came out and harnessed their chariots to the camels and asses, elephants and horses of high pedigree.इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे द्व्यशीतितमस्सर्गः॥Thus ends the eightysecond sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| समुत्थाय | समुत्थाय (√समुत्-स्था + ल्यप्) |
| कुले | कुल (७.१) |
| कुले | कुल (७.१) |
| ते | तद् (१.३) |
| राजन्यवैश्या | राजन्य–वैश्य (१.३) |
| वृषलाश् | वृषल (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| विप्राः | विप्र (१.३) |
| अयूयुजन्न् | अयूयुजन् (√युज् प्र.पु. बहु.) |
| उष्ट्ररथान् | उष्ट्र–रथ (२.३) |
| खरांश् | खर (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| नागान् | नाग (२.३) |
| हयांश् | हय (२.३) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| कुलप्रसूतान् | कुल–प्रसूत (√प्र-सू + क्त, २.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | स | मु | त्था | य | कु | ले | कु | ले | ते |
| रा | ज | न्य | वै | श्या | वृ | ष | ला | श्च | वि | प्राः |
| अ | यू | यु | ज | न्नु | ष्ट्र | र | था | न्ख | रां | श्च |
| ना | गा | न्ह | यां | श्चै | व | कु | ल | प्र | सू | तान् |