अन्वयः
ततः then, भरतः Bharata, काल्यम् at dawn, समुत्थितः risen, स्यन्दनोत्तमम् best chariot, आस्थाय having boarded, रामदर्शनकाङ्क्षया longing to see Rama, शीघ्रम् swiftly, प्रययौ set forth.
M N Dutt
Rising with the morrow, Bharata anxious to behold Rāma, speedily set out ascending an excellent car.
Summary
Getting up at dawn, Bharata boarded his excellent chariot and set forth swiftly, longing to see Rama.
पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| समुत्थितः | समुत्थित (√समुत्-स्था + क्त, १.१) |
| काल्यम् | काल्यम् (अव्ययः) |
| आस्थाय | आस्थाय (√आ-स्था + ल्यप्) |
| स्यन्दनोत्तमम् | स्यन्दन–उत्तम (२.१) |
| प्रययौ | प्रययौ (√प्र-या लिट् प्र.पु. एक.) |
| भरतः | भरत (१.१) |
| शीघ्रं | शीघ्रम् (अव्ययः) |
| रामदर्शनकाङ्क्षया | राम–दर्शन–काङ्क्षा (३.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तः | स | मु | त्थि | तः | का | ल्य |
| मा | स्था | य | स्य | न्द | नो | त्त | मम् |
| प्र | य | यौ | भ | र | तः | शी | घ्रं |
| रा | म | द | र्श | न | का | ङ्क्ष | या |