अन्वयः
राम: Rama, अकण्टकम् free from thorns (enemies), राज्यम् kingdom, प्राप्य having obtained, भरतम् Bharata, देशान्तरं वा out of the country, अथापि वा or else, लोकान्तरम् to the other world, नयिता he will send, ध्रुवम् this is certain.
Summary
Rama, having secured the thornless kingdom, will banish Bharata from the country or else send him to the other world. This is certain.
पदच्छेदः
| ध्रुवं | ध्रुवम् (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| भरतं | भरत (२.१) |
| रामः | राम (१.१) |
| प्राप्य | प्राप्य (√प्र-आप् + ल्यप्) |
| राज्यम् | राज्य (२.१) |
| अकण्टकम् | अकण्टक (२.१) |
| देशान्तरं | देश–अन्तर (२.१) |
| नाययित्वा | नाययित्वा (√नायय् + क्त्वा) |
| लोकान्तरम् | लोक–अन्तर (२.१) |
| अथापि | अथ (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| वा | वा (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ध्रु | वं | तु | भ | र | तं | रा | मः |
| प्रा | प्य | रा | ज्य | म | क | ण्ट | कम् |
| दे | शा | न्त | रं | ना | य | यि | ता |
| लो | का | न्त | र | म | था | पि | वा |