अन्वयः
तत: after that, परम् highly, अप्रीताम् unhappy woman, ब्रुवन्तीम् speaking thus, ताम् that, मन्थराम् to Manthara, दृष्ट्वा having seen, देवी कैकेयी queen Kaikeyi, रामस्य गुणानेव the virtues of Rama, प्रशशंस ह praised.
Summary
Having seen that morose Manthara speaking thus, Kaikeyi commended the virtues of Rama.
पदच्छेदः
| तां | तद् (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| परमप्रीतां | परम–प्रीत (√प्री + क्त, २.१) |
| ब्रुवन्तीं | ब्रुवत् (√ब्रू + शतृ, २.१) |
| मन्थरां | मन्थरा (२.१) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| रामस्यैव | राम (६.१)–एव (अव्ययः) |
| गुणान् | गुण (२.३) |
| देवी | देवी (१.१) |
| कैकेयी | कैकेयी (१.१) |
| प्रशशंस | प्रशशंस (√प्र-शंस् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तां | दृ | ष्ट्वा | प | र | म | प्री | तां |
| ब्रु | व | न्तीं | म | न्थ | रां | त | तः |
| रा | म | स्यै | व | गु | णा | न्दे | वी |
| कै | के | यी | प्र | श | शं | स | ह |