अन्वयः
महायशाः of great renown, सः that Bharata, मुहूर्तम् for a moment, समाश्वस्य composing himself, कौसल्याम् Kausalya, परिसान्त्वेद्यं reassuring, रुदन्नेव still weeping, गुहम् to Guha, वचनम् these words, अब्रवीत् said.
M N Dutt
Having taken comfort for a while, that one of high fame weeping, and solacing Kausalya, spoke to Guha, saying.
Summary
Highly renowned Bharata, composing himself for a moment and still weeping, reassured Kauslaya, and then said this to Guha:
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| मुहूर्तं | मुहूर्त (२.१) |
| समाश्वस्य | समाश्वस्य (√समा-श्वस् + ल्यप्) |
| रुदन्न् | रुदत् (√रुद् + शतृ, १.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| महायशाः | महत्–यशस् (१.१) |
| कौसल्यां | कौसल्या (२.१) |
| परिसान्त्व्येदं | परिसान्त्व्य (√परि-सान्त्वय् + ल्यप्)–इदम् (२.१) |
| गुहं | गुह (२.१) |
| वचनम् | वचन (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | मु | हू | र्तं | स | मा | श्व | स्य |
| रु | द | न्ने | व | म | हा | य | शाः |
| कौ | स | ल्यां | प | रि | सा | न्त्व्ये | दं |
| गु | हं | व | च | न | म | ब्र | वीत् |