अन्वयः
राजन् O king, सखे O friend, आस्माभिः by us, न प्रतिग्राह्यम् should not be received, सर्वदा always, देयम् should be given, इति thus, महात्मना by the great, तेन by him, वयम् we, अनुनीताः were entreated.
M N Dutt
'O friend, we ought not to take anything: ours is always to give.'
Summary
O king that great Rama entreated us in a friendly manner by saying 'O friend we should always give to others but should never accept anything from others'.
पदच्छेदः
| न | न (अव्ययः) |
| ह्य् | हि (अव्ययः) |
| अस्माभिः | मद् (३.३) |
| प्रतिग्राह्यं | प्रतिग्राह्य (√प्रति-ग्रह् + कृत्, १.१) |
| सखे | सखि (८.१) |
| देयं | देय (√दा + कृत्, १.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सर्वदा | सर्वदा (अव्ययः) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| तेन | तद् (३.१) |
| वयं | मद् (१.३) |
| राजन्न् | राजन् (८.१) |
| अनुनीता | अनुनीत (√अनु-नी + क्त, १.३) |
| महात्मना | महात्मन् (३.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| न | ह्य | स्मा | भिः | प्र | ति | ग्रा | ह्यं |
| स | खे | दे | यं | तु | स | र्व | दा |
| इ | ति | ते | न | व | यं | रा | ज |
| न्न | नु | नी | ता | म | हा | त्म | ना |