नियम्य पृष्ठे तु तलाङ्गुलित्रवा;ञ्शरैः सुपूर्णाविषुधी परंतपः ।
महद्धनुः सज्यमुपोह्य लक्ष्मणो; निशामतिष्ठत्परितोऽस्य केवलम् ॥
नियम्य पृष्ठे तु तलाङ्गुलित्रवा;ञ्शरैः सुपूर्णाविषुधी परंतपः ।
महद्धनुः सज्यमुपोह्य लक्ष्मणो; निशामतिष्ठत्परितोऽस्य केवलम् ॥
अन्वयः
परन्तपः scorcher of enemies, लक्ष्मणः Lakshmana, तलाङ्गुलित्रवान् wearing protective covering for his palms and fingers (made of gohaskin), शरैः arrows, सुपूर्णौ filled with, इषुधी two quivers, पृष्ठे on his back, नियम्य strapping, सज्यम् furnished with string, महत् great, धनुः bow, उपोह्य holding, निशाम् during that night, अस्य Rama's, परितः surrounding, अतिष्ठत् केवलम् stood throughout.M N Dutt
Fastening on his back a pair of quivers filled with arrows furnished with finger-fences, and taking his mighty bow, Lakşmaņa all night kept watch around.Summary
Lakshmana, the scorcher of enemies, wearing protective covering for his palms and fingers (made of gohaskin), strapping on his back two quivers filled with arrows, holding a great bow, strung ready, stood sentinel throughout the night guarding the surrounding.पदच्छेदः
| नियम्य | नियम्य (√नि-यम् + ल्यप्) |
| पृष्ठे | पृष्ठ (७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तलाङ्गुलित्रवाञ् | तल–अङ्गुलित्रवत् (१.१) |
| शरैः | शर (३.३) |
| सुपूर्णाविषुधी | सु (अव्ययः)–पूर्ण (√पृ + क्त, २.२)–इषुधि (२.२) |
| परंतपः | परंतप (१.१) |
| महद् | महत् (२.१) |
| धनुः | धनुस् (२.१) |
| सज्यम् | सज्य (२.१) |
| उपोह्य | उपोह्य (√उप-वह् + ल्यप्) |
| लक्ष्मणो | लक्ष्मण (१.१) |
| निशाम् | निशा (२.१) |
| अतिष्ठत् | अतिष्ठत् (√स्था लङ् प्र.पु. एक.) |
| परितो | परितस् (अव्ययः) |
| ऽस्य | इदम् (६.१) |
| केवलम् | केवलम् (अव्ययः) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | य | म्य | पृ | ष्ठे | तु | त | ला | ङ्गु | लि | त्र | वा |
| ञ्श | रैः | सु | पू | र्णा | वि | षु | धी | प | रं | त | पः |
| म | ह | द्ध | नुः | स | ज्य | मु | पो | ह्य | ल | क्ष्म | णो |
| नि | शा | म | ति | ष्ठ | त्प | रि | तो | ऽस्य | के | व | लम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||