उवाच तं भरद्वाजः प्रसादाद्भरतं वचः ।
त्वय्येतत्पुरुषव्याघ्र युक्तं राघववंशजे ।
गुरुवृत्तिर्दमश्चैव साधूनां चानुयायिता ॥
उवाच तं भरद्वाजः प्रसादाद्भरतं वचः ।
त्वय्येतत्पुरुषव्याघ्र युक्तं राघववंशजे ।
गुरुवृत्तिर्दमश्चैव साधूनां चानुयायिता ॥
अन्वयः
पुरुषव्याघ्रः O best of men, गुरुवृत्ति: conduct towards spiritual preceptors, दमश्चैव control over senses, साधूनाम् of virtuous people, अनुयायिता following, एतत् all this, राघववंशजे born in the Raghu race, त्वयि in you, युक्तम् is appropriate.M N Dutt
foremost of men, even this is worthy of you. Serving superiors, restraint of the senses, and following the pious, are ever found in one sprung in the Rāghava line.Summary
O best of men (Bharata) your conduct towards the preceptors, your selfrestraint and devotion to the virtuous are all in keeping with those born in the race of Raghu.पदच्छेदः
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| तं | तद् (२.१) |
| भरद्वाजः | भरद्वाज (१.१) |
| प्रसादाद् | प्रसाद (५.१) |
| भरतं | भरत (२.१) |
| वचः | वचस् (२.१) |
| त्वय्य् | त्वद् (७.१) |
| एतत् | एतद् (१.१) |
| पुरुषव्याघ्र | पुरुष–व्याघ्र (८.१) |
| युक्तं | युक्त (१.१) |
| राघववंशजे | राघव–वंश–ज (७.१) |
| गुरुवृत्तिर् | गुरु–वृत्ति (१.१) |
| दमश् | दम (१.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| साधूनां | साधु (६.३) |
| चानुयायिता | च (अव्ययः)–अनुयायिता (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | वा | च | तं | भ | र | द्वा | जः | प्र | सा | दा | द्भ |
| र | तं | व | चः | त्व | य्ये | त | त्पु | रु | ष | व्या | घ्र |
| यु | क्तं | रा | घ | व | वं | श | जे | गु | रु | वृ | त्ति |
| र्द | म | श्चै | व | सा | धू | नां | चा | नु | या | यि | ता |