असौ वसति ते भ्राता चित्रकूटे महागिरौ ।
श्वस्तु गन्तासि तं देशं वसाद्य सह मन्त्रिभिः ।
एतं मे कुरु सुप्राज्ञ कामं कामार्थकोविद ॥
असौ वसति ते भ्राता चित्रकूटे महागिरौ ।
श्वस्तु गन्तासि तं देशं वसाद्य सह मन्त्रिभिः ।
एतं मे कुरु सुप्राज्ञ कामं कामार्थकोविद ॥
अन्वयः
तं देशम् to that place, श्वः tomorow, गन्तासि shall go, अद्य today, मन्त्रिभिस्सह along with ministers, वस you may stay, सुप्राज्ञ O supremely sagacious prince, कामार्थकोविद who is aware of kama (desire) and artha (prosperity), मे my, एतम् this, कामं desire, कुरु fulfil.M N Dutt
On the morrow you will set out for that region. Do you to-day sojourn here along with your counsellors. O wise one, do this at your pleasure, O you understanding interest and desire.Summary
O supremely sagacious prince gifted with the knowledge of kama (desire) and artha (wealth), tomorrow you go, but to night stay here with your ministers and fulfil my desire.पदच्छेदः
| असौ | अदस् (१.१) |
| वसति | वसति (√वस् लट् प्र.पु. एक.) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| भ्राता | भ्रातृ (१.१) |
| चित्रकूटे | चित्रकूट (७.१) |
| महागिरौ | महत्–गिरि (७.१) |
| श्वस् | श्वस् (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| गन्तासि | गन्तासि (√गम् लुट् म.पु. ) |
| तं | तद् (२.१) |
| देशं | देश (२.१) |
| वसाद्य | वस (√वस् लोट् म.पु. )–अद्य (अव्ययः) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| मन्त्रिभिः | मन्त्रिन् (३.३) |
| एतं | एतद् (२.१) |
| मे | मद् (४.१) |
| कुरु | कुरु (√कृ लोट् म.पु. ) |
| सुप्राज्ञ | सु (अव्ययः)–प्राज्ञ (८.१) |
| कामं | काम (२.१) |
| कामार्थकोविद | काम–अर्थ–कोविद (८.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | सौ | व | स | ति | ते | भ्रा | ता | चि | त्र | कू | टे |
| म | हा | गि | रौ | श्व | स्तु | ग | न्ता | सि | तं | दे | शं |
| व | सा | द्य | स | ह | म | न्त्रि | भिः | ए | तं | मे | कु |
| रु | सु | प्रा | ज्ञ | का | मं | का | मा | र्थ | को | वि | द |