अन्वयः
मन्थरे O Manthara, लब्धार्था च after accomplishsing the objective, प्रतीता च also satisfied, जात्येन belonging to the best , सुनिष्टप्तेन highly refined, सुवर्णेन with gold, ते स्थगु your hump, लेपयिष्यामि will smear.
Summary
O Manthara, when my objective is accomplished and I am fully satisfied, I will smear your hump with the best of refined liquid gold.
पदच्छेदः
| जात्येन | जात्य (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सुवर्णेन | सुवर्ण (३.१) |
| सुनिष्टप्तेन | सु (अव्ययः)–निष्टप्त (√निः-तप् + क्त, ३.१) |
| सुन्दरि | सुन्दरी (८.१) |
| लब्धार्था | लब्ध (√लभ् + क्त, १.१)–अर्थ (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| प्रतीता | प्रतीत (√प्रति-इ + क्त, १.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| लेपयिष्यामि | लेपयिष्यामि (√लेपय् लृट् उ.पु. ) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| स्थगु | स्थगु (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| जा | त्ये | न | च | सु | व | र्णे | न |
| सु | नि | ष्ट | प्ते | न | सु | न्द | रि |
| ल | ब्धा | र्था | च | प्र | ती | ता | च |
| ले | प | यि | ष्या | मि | ते | स्थ | गु |