परिधाय शुभे वस्त्रे देवतेव चरिष्यसि ।
चन्द्रमाह्वयमानेन मुखेनाप्रतिमानना ।
गमिष्यसि गतिं मुख्यां गर्वयन्ती द्विषज्जनम् ॥
परिधाय शुभे वस्त्रे देवतेव चरिष्यसि ।
चन्द्रमाह्वयमानेन मुखेनाप्रतिमानना ।
गमिष्यसि गतिं मुख्यां गर्वयन्ती द्विषज्जनम् ॥
अन्वयः
शुभे auspicious, वस्त्रे garments, परिधाय wearing, देवतेव like a goddess, चरिष्यसि you shall move about, चन्द्रम् of moon, आह्वयमानेन challenging, मुखेन with countenance, अप्रतिमानना with a peerless, द्विषज्जनम् amidst your enemies, गर्वयन्ती feeling proud, मुख्याम् eminent, गतिम् state, गमिष्यसि you will attain.Summary
You shall move about wearing lovely garments like a goddess. With a peerless countenance, as if challenging the Moon and feeling proud, you will attain a state of eminence amidst your enemies.पदच्छेदः
| परिधाय | परिधाय (√परि-धा + ल्यप्) |
| शुभे | शुभ (७.१) |
| वस्त्रे | वस्त्र (७.१) |
| देवतेव | देवता (१.१)–इव (अव्ययः) |
| चरिष्यसि | चरिष्यसि (√चर् लृट् म.पु. ) |
| चन्द्रम् | चन्द्र (२.१) |
| आह्वयमानेन | आह्वयमान (√आ-ह्वा + शानच्, ३.१) |
| मुखेनाप्रतिमानना | मुख (३.१)–अप्रतिम–आनन (१.१) |
| गमिष्यसि | गमिष्यसि (√गम् लृट् म.पु. ) |
| गतिं | गति (२.१) |
| मुख्यां | मुख्य (२.१) |
| द्विषज्जनम् | द्विषत् (√द्विष् + शतृ)–जन (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | रि | धा | य | शु | भे | व | स्त्रे | दे | व | ते | व |
| च | रि | ष्य | सि | च | न्द्र | मा | ह्व | य | मा | ने | न |
| मु | खे | ना | प्र | ति | मा | न | ना | ग | मि | ष्य | सि |
| ग | तिं | मु | ख्यां | ग | र्व | य | न्ती | द्वि | ष | ज्ज | नम् |