पदच्छेदः
| अनेकशतसाहस्रं | अनेक–शत–साहस्र (२.१) |
| मुक्ताहारं | मुक्ता–हार (२.१) |
| वराङ्गना | वर–अङ्गना (१.१) |
| अवमुच्य | अवमुच्य (√अव-मुच् + ल्यप्) |
| वरार्हाणि | वर–अर्ह (२.३) |
| शुभान्य् | शुभ (२.३) |
| आभरणानि | आभरण (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ने | क | श | त | सा | ह | स्रं |
| मु | क्ता | हा | रं | व | रा | ङ्ग | ना |
| अ | व | मु | च्य | व | रा | र्हा | णि |
| शु | भा | न्या | भ | र | णा | नि | च |