संपन्नं राज्यमिच्छंस्तु व्यक्तं प्राप्याभिषेचनम् ।
आवां हन्तुं समभ्येति कैकेय्या भरतः सुतः ॥
संपन्नं राज्यमिच्छंस्तु व्यक्तं प्राप्याभिषेचनम् ।
आवां हन्तुं समभ्येति कैकेय्या भरतः सुतः ॥
अन्वयः
कैकेय्याः Kaikeyi's, सुतः son, भरतः Bharata, अभिषेचनम् प्राप्य having been consecrated, राज्यम् kingdom, सम्पन्नम् endowed with prosperity (without obstacles), इच्छन् desiring, आवाम् both of us, हन्तुम् to slay, समभ्येति is coming, व्यक्तम् this is evident.M N Dutt
Having got himself installed, Kaikeyi's son, Bharata, anxious to render his royalty perfectly safe, is coming hither for the purpose of slaying us both.Summary
It is evident that Kaikeyi's son Bharata, who has been consecrated, is coming to slay both of us desiring the prosperous kingdom (to be without obstacles).पदच्छेदः
| सम्पन्नं | सम्पन्न (√सम्-पद् + क्त, २.१) |
| राज्यम् | राज्य (२.१) |
| इच्छंस् | इच्छत् (√इष् + शतृ, १.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| व्यक्तं | व्यक्त (२.१) |
| प्राप्याभिषेचनम् | प्राप्य (√प्र-आप् + ल्यप्)–अभिषेचन (२.१) |
| आवां | मद् (२.२) |
| हन्तुं | हन्तुम् (√हन् + तुमुन्) |
| समभ्येति | समभ्येति (√समभि-इ लट् प्र.पु. एक.) |
| कैकेय्या | कैकेयी (६.१) |
| भरतः | भरत (१.१) |
| सुतः | सुत (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | प | न्नं | रा | ज्य | मि | च्छं | स्तु |
| व्य | क्तं | प्रा | प्या | भि | षे | च | नम् |
| आ | वां | ह | न्तुं | स | म | भ्ये | ति |
| कै | के | य्या | भ | र | तः | सु | तः |