अन्वयः
हे वीर O mighty warrior, राघव Rama, भवान् you, यन्निमित्तम् on whose account, शाश्वतात् from the perpetual, राज्यात् from kingdom, च्युतः deprived, अयम् such, सम्प्राप्तः has come here, अरिः foe, भरतः Bharata, मे to me, वध्य एव deserves to be slain.
Summary
O that mighty warrior Bharata, on whose account you have been banished from the perpetual kingdom, comes here as a foe and as for me, he deserves to be slain.
पदच्छेदः
| यन्निमित्तं | यद्–निमित्त (२.१) |
| भवान् | भवत् (१.१) |
| राज्याच् | राज्य (५.१) |
| च्युतो | च्युत (√च्यु + क्त, १.१) |
| राघव | राघव (८.१) |
| शाश्वतात् | शाश्वत (५.१) |
| सम्प्राप्तो | सम्प्राप्त (√सम्प्र-आप् + क्त, १.१) |
| ऽयम् | इदम् (१.१) |
| अरिर् | अरि (१.१) |
| वीर | वीर (८.१) |
| भरतो | भरत (१.१) |
| वध्य | वध्य (√वध् + कृत्, १.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| य | न्नि | मि | त्तं | भ | वा | न्रा | ज्या |
| च्च्यु | तो | रा | घ | व | शा | श्व | तीम् |
| सं | प्रा | प्तो | ऽय | म | रि | र्वी | र |
| भ | र | तो | व | ध्य | ए | व | मे |