सा चित्रकूटे भरतेन सेना; धर्मं पुरस्कृत्य विधूय दर्पम् ।
प्रसादनार्थं रघुनन्दनस्य; विरोचते नीतिमता प्रणीता ॥
सा चित्रकूटे भरतेन सेना; धर्मं पुरस्कृत्य विधूय दर्पम् ।
प्रसादनार्थं रघुनन्दनस्य; विरोचते नीतिमता प्रणीता ॥
अन्वयः
धर्मम् righteousness, पुरस्कृत्य adopting, दर्पम् pride, विधूय casting aside, रघुनन्दनस्य Rama's, प्रसादनार्थम् to propitiate, नीतिमता by a moralist, भरतेन by Bharata, प्रणीता having been brought, सा that, सेना army, चित्रकूटे on Chitrakuta, विराजते was shining.M N Dutt
And keeping morality in their fore-front, and renouncing pride, the disciplined forces schooled by Bharata in view of pleasing that descendant of Raghu (Rāma), stayed in Citrakuța.Summary
The army brought by Bharata, the great moralist, was shining around Chitrakuta mountain following dharma, and casting off all pride, in order to please Rama.इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे सप्तनवतितमस्सर्गः॥Thus ends the ninetyseventh sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| सा | तद् (१.१) |
| चित्रकूटे | चित्रकूट (७.१) |
| भरतेन | भरत (३.१) |
| सेना | सेना (१.१) |
| धर्मं | धर्म (२.१) |
| पुरस्कृत्य | पुरस्कृत्य (√पुरस्-कृ + ल्यप्) |
| विधूय | विधूय (√वि-धू + ल्यप्) |
| दर्पम् | दर्प (२.१) |
| प्रसादनार्थं | प्रसादन–अर्थ (२.१) |
| रघुनन्दनस्य | रघुनन्दन (६.१) |
| विरोचते | विरोचते (√वि-रुच् लट् प्र.पु. एक.) |
| नीतिमता | नीतिमत् (३.१) |
| प्रणीता | प्रणीत (√प्र-नी + क्त, १.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | चि | त्र | कू | टे | भ | र | ते | न | से | ना |
| ध | र्मं | पु | र | स्कृ | त्य | वि | धू | य | द | र्पम् |
| प्र | सा | द | ना | र्थं | र | घु | न | न्द | न | स्य |
| वि | रो | च | ते | नी | ति | म | ता | प्र | णी | ता |