अन्वयः
सौमित्रे O Lakshmana, कस्यां चित् आपदि in whatever calamity, पुत्र: son, पितरम् father, कथं नु how, हन्युः can slay, भ्राता वा or a brother, आत्मनः as his own, प्राणम् life, भ्रातरम् his own brother, हन्यात् will kill?
M N Dutt
Do sons, in times of peril, ever slay their father, or brothers their brother like to their life, O son of Sumitrā?
Summary
Whatever be the calamity, O Lakshmana, how will sons slay their father, or a brother kill his own brother who is as dear to him as his own life?
पदच्छेदः
| कथं | कथम् (अव्ययः) |
| नु | नु (अव्ययः) |
| पुत्राः | पुत्र (१.३) |
| पितरं | पितृ (२.१) |
| हन्युः | हन्युः (√हन् विधिलिङ् प्र.पु. बहु.) |
| कस्यांचिद् | कश्चित् (७.१) |
| आपदि | आपद् (७.१) |
| भ्राता | भ्रातृ (१.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| भ्रातरं | भ्रातृ (२.१) |
| हन्यात् | हन्यात् (√हन् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| सौमित्रे | सौमित्रि (८.१) |
| प्राणम् | प्राण (२.१) |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| क | थं | नु | पु | त्राः | पि | त | रं |
| ह | न्युः | क | स्यां | चि | दा | प | दि |
| भ्रा | ता | वा | भ्रा | त | रं | ह | न्या |
| त्सौ | मि | त्रे | प्रा | ण | मा | त्म | नः |