अन्वयः
लक्ष्मण O Lakshmana, भरतोऽपि Bharata also, अस्मै to him, राज्यम् kingdom, प्रयच्छ give, इति thus, उच्यमानः having been told, तद्वच: that word, बाढम् इत्येव certainly so, वक्ष्यति will say.
M N Dutt
Earnestly exhorted by me, saying, “Do you place the kingdom in his hands', he will say, "Very well'."
Summary
O Lakshmana if I earnestly exhort Bharata to offer this kingdom to you, then on hearing those words, he would say, 'Certainly so'.
पदच्छेदः
| उच्यमानो | उच्यमान (√वच् + शानच्, १.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| भरतो | भरत (१.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| लक्ष्मण | लक्ष्मण (८.१) |
| तत्त्वतः | तत्त्व (५.१) |
| राज्यम् | राज्य (२.१) |
| अस्मै | इदम् (४.१) |
| प्रयच्छेति | प्रयच्छ (√प्र-यम् लोट् म.पु. )–इति (अव्ययः) |
| बाढम् | बाढम् (अव्ययः) |
| इत्य् | इति (अव्ययः) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| वक्ष्यति | वक्ष्यति (√वच् लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| उ | च्य | मा | नो | हि | भ | र | तो |
| म | या | ल | क्ष्म | ण | त | त्त्व | तः |
| रा | ज्य | म | स्मै | प्र | य | च्छे | ति |
| बा | ढ | मि | त्ये | व | व | क्ष्य | ति |