अन्वयः
भ्रातुः brother's, पार्थिवव्यञ्जनान्वितौ bearing the signs of royalty, चरणौ feet, यावत् till such time, शिरसा with the head, न धारयिष्यामि I will not carry, मे to me, शान्ति: peace, न भविष्यति shall not come.
M N Dutt
So long as I do not take on my head those feet of my brother bearing royal marks, I shall not attain peace of mind.
Summary
Peace shall not come to me until I hold on my head the feet of my brother, the insignia of royalty.
पदच्छेदः
| यावन् | यावत् (अव्ययः) |
| न | न (अव्ययः) |
| चरणौ | चरण (२.२) |
| भ्रातुः | भ्रातृ (६.१) |
| पार्थिवव्यञ्जनान्वितौ | पार्थिव–व्यञ्जन–अन्वित (२.२) |
| शिरसा | शिरस् (३.१) |
| धारयिष्यामि | धारयिष्यामि (√धारय् लृट् उ.पु. ) |
| न | न (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| शान्तिर् | शान्ति (१.१) |
| भविष्यति | भविष्यति (√भू लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| या | व | न्न | च | र | णौ | भ्रा | तुः |
| पा | र्थि | व | व्य | ञ्ज | ना | न्वि | तौ |
| शि | र | सा | धा | र | यि | ष्या | मि |
| न | मे | शा | न्ति | र्भ | वि | ष्य | ति |