पदच्छेदः
| अर्करश्मिप्रतीकाशैर् | अर्क–रश्मि–प्रतीकाश (३.३) |
| घोरैस् | घोर (३.३) |
| तूणीगतैः | तूणी–गत (√गम् + क्त, ३.३) |
| शरैः | शर (३.३) |
| शोभितां | शोभित (√शोभय् + क्त, २.१) |
| दीप्तवदनैः | दीप्त (√दीप् + क्त)–वदन (३.३) |
| सर्पैर् | सर्प (३.३) |
| भोगवतीम् | भोगवती (२.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | र्क | र | श्मि | प्र | ती | का | शै |
| र्घो | रै | स्तू | णी | ग | तैः | श | रैः |
| शो | भि | तां | दी | प्त | व | द | नैः |
| स | र्पै | र्भो | ग | व | ती | मि | व |