बाष्पापिहित कण्ठश्च प्रेक्ष्य रामं यशस्विनम् ।
आर्येत्येवाभिसंक्रुश्य व्याहर्तुं नाशकत्ततः ॥
बाष्पापिहित कण्ठश्च प्रेक्ष्य रामं यशस्विनम् ।
आर्येत्येवाभिसंक्रुश्य व्याहर्तुं नाशकत्ततः ॥
अन्वयः
यशस्विनम् glorious, रामम् Rama, प्रेक्ष्य on seeing, बाष्पाभिहतकण्ठश्च with choked throat, अथ then, आर्येत्येव O Arya, सङ्क्रुश्य crying out, तदा thereafter, व्याहर्तुम् to talk further, नाशकत् was not able.M N Dutt
And beholding the illustrious Rāma, Bharata with his utterance choked with emotion, exclaimed, O noble one, and was unable to say anything further.Summary
As he beheld the glorious Rama, with his throat choken with tears, he cried out, O Arya (venerable one) and thereafter, was unable to speak any more.पदच्छेदः
| बाष्पापिहितकण्ठश् | बाष्प–अपिहित (√अपि-धा + क्त)–कण्ठ (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| प्रेक्ष्य | प्रेक्ष्य (√प्र-ईक्ष् + ल्यप्) |
| रामं | राम (२.१) |
| यशस्विनम् | यशस्विन् (२.१) |
| आर्येत्य् | आर्य (८.१)–इति (अव्ययः) |
| एवाभिसंक्रुश्य | एव (अव्ययः)–अभिसंक्रुश्य (√अभिसम्-क्रुश् + ल्यप्) |
| व्याहर्तुं | व्याहर्तुम् (√व्या-हृ + तुमुन्) |
| नाशकत् | न (अव्ययः)–अशकत् (√शक् प्र.पु. एक.) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बा | ष्पा | पि | हि | त | क | ण्ठ | श्च |
| प्रे | क्ष्य | रा | मं | य | श | स्वि | नम् |
| आ | र्ये | त्ये | वा | भि | सं | क्रु | श्य |
| व्या | ह | र्तुं | ना | श | क | त्त | तः |