अन्वयः
शत्रुघ्नश्चापि Satrughna too, रुदन् weeping, रामस्य Rama's, चरणौ feet, ववन्दे prostrated, सः रामश्च that Rama also, तौ उभौ the two of them, समालिङ्ग्य having embraced, अश्रूणि tears, अवर्तयत् shed.
Summary
Satrughna also prostrated himself at the feet of tearful Rama who embraced both of them.
पदच्छेदः
| शत्रुघ्नश् | शत्रुघ्न (१.१) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| ववन्दे | ववन्दे (√वन्द् लिट् प्र.पु. एक.) |
| चरणौ | चरण (२.२) |
| रुदन् | रुदत् (√रुद् + शतृ, १.१) |
| ताव् | तद् (२.२) |
| उभौ | उभ् (२.२) |
| स | तद् (१.१) |
| समालिङ्ग्य | समालिङ्ग्य (√समा-लिङ्गय् + ल्यप्) |
| रामो | राम (१.१) |
| ऽप्य् | अपि (अव्ययः) |
| अश्रूण्य् | अश्रु (२.३) |
| अवर्तयत् | अवर्तयत् (√वर्तय् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| श | त्रु | घ्न | श्चा | पि | रा | म | स्य |
| व | व | न्दे | च | र | णौ | रु | दन् |
| ता | वु | भौ | स | स | मा | लि | ङ्ग्य |
| रा | मो | ऽप्य | श्रू | ण्य | व | र्त | यत् |