ततः सुमन्त्रेण गुहेन चैव; समीयतू राजसुतावरण्ये ।
दिवाकरश्चैव निशाकरश्च; यथाम्बरे शुक्रबृहस्पतिभ्याम् ॥
ततः सुमन्त्रेण गुहेन चैव; समीयतू राजसुतावरण्ये ।
दिवाकरश्चैव निशाकरश्च; यथाम्बरे शुक्रबृहस्पतिभ्याम् ॥
अन्वयः
ततः therafter, अरण्ये in the forest, राजसुतौ the princes (Rama and Lakshmana), अम्बरे in the sky, दिवाकरश्चैव Sun, निशाकरश्च Moon, शुक्रबृहस्पतिभ्याम् with Sukra and Brihaspathi, यथा similarly, सुमन्त्रेण with Sumantra, गुहेन चैव with Guha, समीयतुः met.M N Dutt
Then Śatrughna also weeping paid homage unto the feet of Rāma. And shedding tears, Rāma embraced them both. Then as in the sky, the Sun and the Moon meet with śukra and Brhaspati, those two princes (Rāma and Laks mana) met with Sumantra and Guha in the forest.Summary
Thereafter, princes Rama and Lakshmana joined Sumantra and Guha in the forest like the Sun and the Moon meeting the planets Sukra and Brihaspati in the sky.पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| सुमन्त्रेण | सुमन्त्र (३.१) |
| गुहेन | गुह (३.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| समीयतू | समीयतुः (√सम्-इ लिट् प्र.पु. द्वि.) |
| राजसुताव् | राजन्–सुत (१.२) |
| अरण्ये | अरण्य (७.१) |
| दिवाकरश् | दिवाकर (१.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| निशाकरश् | निशाकर (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| यथाम्बरे | यथा (अव्ययः)–अम्बर (७.१) |
| शुक्रबृहस्पतिभ्याम् | शुक्र–बृहस्पति (३.२) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | सु | म | न्त्रे | ण | गु | हे | न | चै | व |
| स | मी | य | तू | रा | ज | सु | ता | व | र | ण्ये |
| दि | वा | क | र | श्चै | व | नि | शा | क | र | श्च |
| य | था | म्ब | रे | शु | क्र | बृ | ह | स्प | ति | भ्याम् |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||