कच्चिन्नागवनं गुप्तं कुञ्जराणां च तृप्यसि ।
कच्चिद्दर्शयसे नित्यं मनुष्याणां विभूषितम् ।
उत्थायोत्थाय पूर्वाह्णे राजपुत्रो महापथे ॥
कच्चिन्नागवनं गुप्तं कुञ्जराणां च तृप्यसि ।
कच्चिद्दर्शयसे नित्यं मनुष्याणां विभूषितम् ।
उत्थायोत्थाय पूर्वाह्णे राजपुत्रो महापथे ॥
अन्वयः
राजपुत्र O prince नित्यम् daily, पूर्वाह्णे early in the morning, उत्थायोत्थाय rising early, महापथे on the thoroughfare, मानुष्याणाम् to the people, विभूषितम् welladorned, दर्शयसे कच्चित् I trust you are presenting yourself.M N Dutt
And do you show yourself daily in the court, well robed? And rising in the morning, do you show yourself in the high-ways?Summary
O prince, I trust, you rise early daily and present yourself welladomed to the people on the thoroughfare.पदच्छेदः
| कच्चिन् | कच्चित् (अव्ययः) |
| नागवनं | नागवन (१.१) |
| गुप्तं | गुप्त (√गुप् + क्त, १.१) |
| कुञ्जराणां | कुञ्जर (६.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| तृप्यसि | तृप्यसि (√तृप् लट् म.पु. ) |
| कच्चिद् | कच्चित् (अव्ययः) |
| दर्शयसे | दर्शयसे (√दर्शय् लट् म.पु. ) |
| नित्यं | नित्यम् (अव्ययः) |
| मनुष्याणां | मनुष्य (६.३) |
| विभूषितम् | विभूषित (२.१) |
| उत्थायोत्थाय | उत्थाय (√उत्-स्था + ल्यप्)–उत्थाय (√उत्-स्था + ल्यप्) |
| पूर्वाह्णे | पूर्वाह्ण (७.१) |
| राजपुत्रो | राजन्–पुत्र (१.१) |
| महापथे | महापथ (७.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | च्चि | न्ना | ग | व | नं | गु | प्तं | कु | ञ्ज | रा | णां |
| च | तृ | प्य | सि | क | च्चि | द्द | र्श | य | से | नि | त्यं |
| म | नु | ष्या | णां | वि | भू | षि | तम् | उ | त्था | यो | त्था |
| य | पू | र्वा | ह्णे | रा | ज | पु | त्रो | म | हा | प | थे |