अन्वयः
रामं प्रति about Rama, अनुयाचतः while beseeching, तस्य भरतस्य that Bharata's, वचः words, श्रुत्वा hearing, नागराः pertaining to the city, विविधाः various classes, जनाः people, साधु इति as well said, अमन्यन्त exclaimed.
Summary
Hearing the words of Bharata beseeching Rama to return, various classes of people of the city of Ayodhya, in approbation exclaimed well said.
पदच्छेदः
| तस्य | तद् (६.१) |
| साध्व् | साधु (१.१) |
| इत्य् | इति (अव्ययः) |
| अमन्यन्त | अमन्यन्त (√मन् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| नागरा | नागर (१.३) |
| विविधा | विविध (१.३) |
| जनाः | जन (१.३) |
| भरतस्य | भरत (६.१) |
| वचः | वचस् (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| रामं | राम (२.१) |
| प्रत्यनुयाचतः | प्रत्यनुयाचत् (√प्रत्यनु-याच् + शतृ, ६.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | स्य | सा | ध्वि | त्य | म | न्य | न्त |
| ना | ग | रा | वि | वि | धा | ज | नाः |
| भ | र | त | स्य | व | चः | श्रु | त्वा |
| रा | मं | प्र | त्य | नु | या | च | तः |