अन्वयः
ते they, तूष्णीम् silently, समुपासीनाः sat togethr, कश्चित् any one, किञ्चित् a little, न अब्रवीत् did not speak, भरतस्तु Bharata on his part, सुहृन्मध्ये from among the friends, रामम् addressing Rama, वचनम् these words, अब्रवीत् said.
Summary
All of them sat together silently and no one uttered a word. Bharata alone from among them addressed Rama saying:
पदच्छेदः
| तूष्णीं | तूष्णीम् (अव्ययः) |
| ते | तद् (१.३) |
| समुपासीना | समुपासीन (√समुप-आस् + क्त, १.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| कश्चित् | कश्चित् (१.१) |
| किंचिद् | कश्चित् (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| भरतस् | भरत (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सुहृन्मध्ये | सुहृद्–मध्य (७.१) |
| रामं | राम (२.१) |
| वचनम् | वचन (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तू | ष्णीं | ते | स | मु | पा | सी | ना |
| न | क | श्चि | त्किं | चि | द | ब्र | वीत् |
| भ | र | त | स्तु | सु | हृ | न्म | ध्ये |
| रा | म | व | च | न | म | ब्र | वीत् |