अन्वयः
नः our, पिता father, भृत्यानाम् of dependents, भरणात् by nourishing, सम्यक् splendidly, प्रजानाम् subjects, परिपालनात् by governing, धर्मेण in righteous ways, अर्थानाम् of the wealth, आदानात् accepting, त्रिदिवम् heaven, गतः went.
Summary
Our father nourished his dependents, splendidly governed his subjects and accepted wealth through righteous ways. Because of these pious acts, he could go to heaven.
पदच्छेदः
| भृत्यानां | भृत्य (६.३) |
| भरणात् | भरण (५.१) |
| सम्यक् | सम्यक् (अव्ययः) |
| प्रजानां | प्रजा (६.३) |
| परिपालनात् | परिपालन (५.१) |
| अर्थादानाच् | अर्थ–आदान (५.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| धार्मेण | धार्म (३.१) |
| पिता | पितृ (१.१) |
| नस् | मद् (६.३) |
| त्रिदिवं | त्रिदिव (२.१) |
| गतः | गत (√गम् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| भृ | त्या | नां | भ | र | णा | त्स | म्य |
| क्प्र | जा | नां | प | रि | पा | ल | नात् |
| अ | र्था | दा | ना | च्च | धा | र्मे | ण |
| पि | ता | न | स्त्रि | दि | वं | ग | तः |