अन्वयः
राघव Rama, महात्मा the magnanimous one, त्वम् you, अमरोपमसत्त्वः resemble gods in nature, सत्यसङ्गरः true to your promis, सर्वज्ञः allknowing, सर्वदर्शी च allseeing, बुद्धिमांश्च असि you are a man of wisdom.
Summary
O magnanimous Rama, your nature is divine and you are true to your promises. You are omniscient, allseeing and wise.
पदच्छेदः
| अमरोपमसत्त्वस् | अमर–उपम–सत्त्व (१.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| महात्मा | महात्मन् (१.१) |
| सत्यसंगरः | सत्य–संगर (१.१) |
| सर्वज्ञः | सर्व–ज्ञ (१.१) |
| सर्वदर्शी | सर्व–दर्शिन् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| बुद्धिमांश् | बुद्धिमत् (१.१) |
| चासि | च (अव्ययः)–असि (√अस् लट् म.पु. ) |
| राघव | राघव (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | म | रो | प | म | स | त्त्व | स्त्वं |
| म | हा | त्मा | स | त्य | सं | ग | रः |
| स | र्व | ज्ञः | स | र्व | द | र्शी | च |
| बु | द्धि | मां | श्चा | सि | रा | घ | व |