को हि धर्मार्थयोर्हीनमीदृशं कर्म किल्बिषम् ।
स्त्रियाः प्रियचिकीर्षुः सन्कुर्याद्धर्मज्ञ धर्मवित् ॥
को हि धर्मार्थयोर्हीनमीदृशं कर्म किल्बिषम् ।
स्त्रियाः प्रियचिकीर्षुः सन्कुर्याद्धर्मज्ञ धर्मवित् ॥
अन्वयः
धर्मज्ञ O knower of ways of righteousness, धर्मवित् knower of righeousness, को हि who indeed, स्त्रियाः for the sake of a women, प्रियम् pleasure, चिकीर्षुः सन् desirous of doing, धर्मार्थयोः for dharma and artha, हीनम् bereft of, किल्बिषम् sinful, ईदृशम् this kind of, कर्म act, कुर्यात् will do?Summary
O Rama, conversant with righteousness, will any one who knows the meaning of righteousness, do such a sinful act contrary to dharma and artha to please a woman?पदच्छेदः
| को | क (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| धर्मार्थयोर् | धर्म–अर्थ (६.२) |
| हीनम् | हीन (√हा + क्त, २.१) |
| ईदृशं | ईदृश (२.१) |
| कर्म | कर्मन् (२.१) |
| किल्बिषम् | किल्बिष (२.१) |
| स्त्रियाः | स्त्री (६.१) |
| प्रियचिकीर्षुः | प्रिय–चिकीर्षु (१.१) |
| सन् | सत् (√अस् + शतृ, १.१) |
| कुर्याद् | कुर्यात् (√कृ विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| धर्मज्ञ | धर्म–ज्ञ (८.१) |
| धर्मवित् | धर्म–विद् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| को | हि | ध | र्मा | र्थ | यो | र्ही | न |
| मी | दृ | शं | क | र्म | कि | ल्बि | षम् |
| स्त्रि | याः | प्रि | य | चि | की | र्षुः | स |
| न्कु | र्या | द्ध | र्म | ज्ञ | ध | र्म | वित् |