अन्वयः
आत्मवान् selfpossessed, दुर्धर्षः invincible रामः Rama, महारण्यम् great forest, दण्डकारण्यम् Dandaka forest, प्रविश्य having entered, तापसाश्रममण्डलम् multitude of hermitages of the ascetics, ददर्श saw.
Summary
The invincible and selfpossessed Rama entered the great forest of Dandaka and saw there a multitude of hermitages of the ascetics.
पदच्छेदः
| प्रविश्य | प्रविश्य (√प्र-विश् + ल्यप्) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| महारण्यं | महत्–अरण्य (२.१) |
| दण्डकारण्यम् | दण्डक–अरण्य (२.१) |
| आत्मवान् | आत्मवत् (१.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रामो | राम (१.१) |
| दुर्धर्षस् | दुर्धर्ष (१.१) |
| तापसाश्रममण्डलम् | तापस–आश्रम–मण्डल (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्र | वि | श्य | तु | म | हा | र | ण्यं |
| द | ण्ड | का | र | ण्य | मा | त्म | वान् |
| द | द | र्श | रा | मो | दु | र्ध | र्ष |
| स्ता | प | सा | श्र | म | म | ण्ड | लम् |