अन्वयः
राघव O Rama, इन्द्रस्य Indra's, इह here, चतुर्भागः fourth part, प्रजाः people, रक्षति protects, तस्मात् therefore, राजा king, नमस्कृतः obeyed, वरान् best, भोगान् pleasures, भुङक्ते enjoys.
Summary
O Rama, in this world a king is considered the fourth part of Indra as he protects the people. Therefore, he is respected and he enjoys the choicest pleasures of life.
पदच्छेदः
| इन्द्रस्येव | इन्द्र (६.१)–इव (अव्ययः) |
| चतुर्भागः | चतुर्भाग (१.१) |
| प्रजा | प्रजा (२.३) |
| रक्षति | रक्षति (√रक्ष् लट् प्र.पु. एक.) |
| राघव | राघव (८.१) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| तस्माद् | तस्मात् (अव्ययः) |
| वरान् | वर (२.३) |
| भोगान् | भोग (२.३) |
| भुङ्क्ते | भुङ्क्ते (√भुज् लट् प्र.पु. एक.) |
| लोकनमस्कृतः | लोक–नमस्कृत (√नमस्-कृ + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | न्द्र | स्यै | व | च | तु | र्भा | गः |
| प्र | जा | र | क्ष | ति | रा | घ | व |
| रा | जा | त | स्मा | द्व | ना | न्भो | गा |
| न्भु | ङ्क्ते | लो | क | न | म | स्कृ | तः |