त्रीन्मासानष्टमासांश्च राघवो न्यवसत्सुखम् ।
तथा संवसतस्तस्य मुनीनामाश्रमेषु वै ।
रमतश्चानुकुल्येन ययुः संवत्सरा दश ॥
त्रीन्मासानष्टमासांश्च राघवो न्यवसत्सुखम् ।
तथा संवसतस्तस्य मुनीनामाश्रमेषु वै ।
रमतश्चानुकुल्येन ययुः संवत्सरा दश ॥
अन्वयः
तथा in that way, तस्य for him, आश्रमेषु in the hermitages, वसतः while he was living, रमतश्च and enjoying, दश ten, संवत्सराः years, आनुकूल्येन favourably, ययुः passed.M N Dutt
And as Rāma lived in the asylums of the ascetics and amused himself through their good graces, ten years were passed away (in this way).Summary
Thus enjoying their stay in the hermitages, Rama, Sita and Lakshmana spent ten favourable years.पदच्छेदः
| त्रीन् | त्रि (२.३) |
| मासान् | मास (२.३) |
| अष्टमासांश् | अष्टन्–मास (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| राघवो | राघव (१.१) |
| न्यवसत् | न्यवसत् (√नि-वस् लङ् प्र.पु. एक.) |
| सुखम् | सुखम् (अव्ययः) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| संवसतस् | संवसत् (√सम्-वस् + शतृ, ६.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| मुनीनाम् | मुनि (६.३) |
| आश्रमेषु | आश्रम (७.३) |
| वै | वै (अव्ययः) |
| रमतश् | रमत् (√रम् + शतृ, ६.१) |
| चानुकूल्येन | च (अव्ययः)–आनुकूल्य (३.१) |
| ययुः | ययुः (√या लिट् प्र.पु. बहु.) |
| संवत्सरा | संवत्सर (१.३) |
| दश | दशन् (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्री | न्मा | सा | न | ष्ट | मा | सां | श्च | रा | घ | वो | न्य |
| व | स | त्सु | खम् | त | था | सं | व | स | त | स्त | स्य |
| मु | नी | ना | मा | श्र | मे | षु | वै | र | म | त | श्चा |
| नु | कु | ल्ये | न | य | युः | सं | व | त्स | रा | द | श |