अन्वयः
तम् to that, मुनिवरम् best of sages, स्वयम् myself, अहम् I, शुश्रूषेयमपि I may serve, यदि that, एषः this, महान् great, मनोरथः desire, मे my, हृदि in the heart, परिवर्तते is being entertained.
Summary
There is a great desire in my heart to serve in person the best of sages, Agastya.
पदच्छेदः
| मनोरथो | मनोरथ (१.१) |
| महान् | महत् (१.१) |
| एष | एतद् (१.१) |
| हृदि | हृद् (७.१) |
| सम्परिवर्तते | सम्परिवर्तते (√सम्परि-वृत् लट् प्र.पु. एक.) |
| यद् | यत् (अव्ययः) |
| अहं | मद् (१.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| मुनिवरं | मुनि–वर (२.१) |
| शुश्रूषेयम् | शुश्रूषेयम् (√शुश्रूष् विधिलिङ् उ.पु. ) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| स्वयम् | स्वयम् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| म | नो | र | थो | म | हा | ने | ष |
| हृ | दि | सं | प | रि | व | र्त | ते |
| य | द | हं | तं | मु | नि | व | रं |
| शु | श्रू | षे | य | म | पि | स्व | यम् |