M N Dutt
Passing a night there, do you, O Rāma, in the morning, taking a southerly course, go by the skirts of the forest tract. Passing a Yojana, you । shall come upon Agastya's asylum, located at a charming woodland graced with many a tree.
पदच्छेदः
| तत्रैकां | तत्र (अव्ययः)–एक (२.१) |
| रजनीम् | रजनी (२.१) |
| उष्य | उष्य (√वस् + क्त्वा) |
| प्रभाते | प्रभात (७.१) |
| राम | राम (८.१) |
| गम्यताम् | गम्यताम् (√गम् प्र.पु. एक.) |
| दक्षिणां | दक्षिण (२.१) |
| दिशम् | दिश् (२.१) |
| आस्थाय | आस्थाय (√आ-स्था + ल्यप्) |
| वनखण्डस्य | वनखण्ड (६.१) |
| पार्श्वतः | पार्श्वतस् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | त्रै | कां | र | ज | नी | मु | ष्य |
| प्र | भा | ते | रा | म | ग | म्य | ताम् |
| द | क्षि | णां | दि | श | मा | स्था | य |
| व | न | ख | ण्ड | स्य | पा | र्श्व | तः |