स हि रम्यो वनोद्देशो बहुपादपसंकुलः ।
यदि बुद्धिः कृता द्रष्टुमगस्त्यं तं महामुनिम् ।
अद्यैव गमने बुद्धिं रोचयस्व महायशः ॥
स हि रम्यो वनोद्देशो बहुपादपसंकुलः ।
यदि बुद्धिः कृता द्रष्टुमगस्त्यं तं महामुनिम् ।
अद्यैव गमने बुद्धिं रोचयस्व महायशः ॥
अन्वयः
महायशः O glorious one, महामुनिम् to the great sage, तम् him, अगस्त्यम् to Agastya, द्रष्टुम् to see, बुद्धि: mind, कृता यदि if arises, अद्यैव today itself, गमने in going, बुद्धिम् thought, रोचयस्व may entertain.M N Dutt
O magnanimous one, if you intend to see the mighty ascetic, Agastya, in that charming woodland, containing a great many trees, then do you make up your mind to set out this very day.Summary
O glorious one, if you have made up your mind to visit that great sage Agastya, think of starting today itself.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| रम्यो | रम्य (१.१) |
| वनोद्देशो | वन–उद्देश (१.१) |
| बहुपादपसंकुलः | बहु–पादप–संकुल (१.१) |
| यदि | यदि (अव्ययः) |
| बुद्धिः | बुद्धि (१.१) |
| कृता | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| द्रष्टुम् | द्रष्टुम् (√दृश् + तुमुन्) |
| अगस्त्यं | अगस्त्य (२.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| महामुनिम् | महत्–मुनि (२.१) |
| अद्यैव | अद्य (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| गमने | गमन (७.१) |
| बुद्धिं | बुद्धि (२.१) |
| रोचयस्व | रोचयस्व (√रोचय् लोट् म.पु. ) |
| महायशः | महत्–यशस् (८.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | हि | र | म्यो | व | नो | द्दे | शो | ब | हु | पा | द |
| प | सं | कु | लः | य | दि | बु | द्धिः | कृ | ता | द्र | ष्टु |
| म | ग | स्त्यं | तं | म | हा | मु | निम् | अ | द्यै | व | ग |
| म | ने | बु | द्धिं | रो | च | य | स्व | म | हा | य | शः |