ततोऽब्रवीन्मुनि श्रेष्ठः श्रुत्वा रामस्य भाषितम् ।
ध्यात्वा मुहूर्तं धर्मात्मा धीरो धीरतरं वचः ॥
ततोऽब्रवीन्मुनि श्रेष्ठः श्रुत्वा रामस्य भाषितम् ।
ध्यात्वा मुहूर्तं धर्मात्मा धीरो धीरतरं वचः ॥
अन्वयः
ततः thereafter, धर्मात्मा a righteous soul, धीरः cool, मुनिश्रेष्ठः best among sages, रामस्य Rama's, तत् that, वचः words, श्रुत्वा on hearing, मुहूर्तम् for a while, ध्यात्वा after thinking, धीरतरम् more solemn, वचः word, अब्रवीत् uttered.M N Dutt
Hearing Rāma's words, that best of ascetics, reflecting for a while, spoke these excellent words.Summary
On hearing the words of Rama, Agastya, the best among the sages, coolheaded and righteous, thought a while and uttered these words coolly :पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽब्रवीन् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| मुनिश्रेष्ठः | मुनि–श्रेष्ठ (१.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| भाषितम् | भाषित (२.१) |
| ध्यात्वा | ध्यात्वा (√ध्या + क्त्वा) |
| मुहूर्तं | मुहूर्त (२.१) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| धीरो | धीर (१.१) |
| धीरतरं | धीरतर (२.१) |
| वचः | वचस् (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | ऽब्र | वी | न्मु | नि | श्रे | ष्ठः |
| श्रु | त्वा | रा | म | स्य | भा | षि | तम् |
| ध्या | त्वा | मु | हू | र्तं | ध | र्मा | त्मा |
| धी | रो | धी | र | त | रं | व | चः |