अन्वयः
अगस्त्येन by Agastya, एवम् thus, उक्तः was said, सौमित्रिणा सह with Lakshmana, रामः Rama, सत्यवादिनम् to the truthful, तम् that, ऋषिम् sage, सत्कृत्य after worshipping with respect, आमन्त्रयामास took leave .
M N Dutt
Thus accosted by Agastya, Rāma along with Sumitra's son, honouring the truth-speaking saint, greeted him.
Summary
Thus addressed by Agastya, Rama with Lakshmana paid respects to the sage wedded to truth and took leave of him.
पदच्छेदः
| अगस्त्येनैवम् | अगस्त्य (३.१)–एवम् (अव्ययः) |
| उक्तस् | उक्त (√वच् + क्त, १.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| रामः | राम (१.१) |
| सौमित्रिणा | सौमित्रि (३.१) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| सत्कृत्यामन्त्रयामास | सत्कृत्य (√सत्-कृ + ल्यप्)–आमन्त्रयामास (√आ-मन्त्रय् प्र.पु. एक.) |
| तम् | तद् (२.१) |
| ऋषिं | ऋषि (२.१) |
| सत्यवादिनम् | सत्य–वादिन् (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | ग | स्त्ये | नै | व | मु | क्त | स्तु |
| रा | मः | सौ | मि | त्रि | णा | स | ह |
| सा | त्कृ | त्या | म | न्त्र | या | मा | स |
| त | मृ | षिं | स | त्य | वा | दि | नम् |