पदच्छेदः
| ताम्रापि | ताम्रा (१.१)–अपि (अव्ययः) |
| सुषुवे | सुषुवे (√सू लिट् प्र.पु. एक.) |
| कन्याः | कन्या (२.३) |
| पञ्चैता | पञ्चन् (२.३)–एतद् (२.३) |
| लोकविश्रुताः | लोक–विश्रुत (√वि-श्रु + क्त, २.३) |
| उलूकाञ् | उलूक (२.३) |
| जनयत् | जनयत् (√जनय् लङ् प्र.पु. एक.) |
| क्रौञ्ची | क्रौञ्ची (१.१) |
| भासी | भासी (१.१) |
| भासान् | भास (२.३) |
| व्यजायत | व्यजायत (√वि-जन् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | म्रा | पि | सु | षु | वे | क | न्याः |
| प | ञ्चै | ता | लो | क | वि | श्रु | ताः |
| उ | लू | का | ञ्ज | न | य | त्क्रौ | ञ्ची |
| भा | सी | भा | सा | न्व्य | जा | य | त |