मुखतो ब्राह्मणा जाता उरसः क्षत्रियास्तथा ।
ऊरुभ्यां जज्ञिरे वैश्याः पद्भ्यां शूद्रा इति श्रुतिः ॥
मुखतो ब्राह्मणा जाता उरसः क्षत्रियास्तथा ।
ऊरुभ्यां जज्ञिरे वैश्याः पद्भ्यां शूद्रा इति श्रुतिः ॥
M N Dutt
From the mouth, it is known sprang Brahmanas, from the breast, Ksatriya, from the thighs, Vaisyas, and from the feet, Sudras.पदच्छेदः
| मुखतो | मुख (५.१) |
| ब्राह्मणा | ब्राह्मण (१.३) |
| जाता | जात (√जन् + क्त, १.३) |
| उरसः | उरस् (५.१) |
| क्षत्रियास् | क्षत्रिय (१.३) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| ऊरुभ्यां | ऊरु (५.२) |
| जज्ञिरे | जज्ञिरे (√जन् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| वैश्याः | वैश्य (१.३) |
| पद्भ्यां | पद् (५.२) |
| शूद्रा | शूद्र (१.३) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| श्रुतिः | श्रुति (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मु | ख | तो | ब्रा | ह्म | णा | जा | ता |
| उ | र | सः | क्ष | त्रि | या | स्त | था |
| ऊ | रु | भ्यां | ज | ज्ञि | रे | वै | श्याः |
| प | द्भ्यां | शू | द्रा | इ | ति | श्रु | तिः |