अन्वयः
धर्मात्मा righteous self, सः Rama, सीतया with Sita, लक्ष्मणेन च and with Lakshmana, अन्वास्यमानः served by, स्वर्गलोके in heaven, अमरः god, यथा as, कञ्चित् कालम् for some time, न्यवसत् lived.
M N Dutt
And ministered to by Sītā and Lakşmaņa that righteous one lived there, like the immortals in heaven.
Summary
Righteous Rama, served by Lakshmana, and Sita lived there for some time like a god in heaven. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे पञ्चदशस्सर्गः॥Thus ends the fifteenth sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.
पदच्छेदः
| कंचित् | कश्चित् (२.१) |
| कालं | काल (२.१) |
| स | तद् (१.१) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| सीतया | सीता (३.१) |
| लक्ष्मणेन | लक्ष्मण (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| अन्वास्यमानो | अन्वास्यमान (√अनु-आस् + शानच्, १.१) |
| न्यवसत् | न्यवसत् (√नि-वस् लङ् प्र.पु. एक.) |
| स्वर्गलोके | स्वर्ग–लोक (७.१) |
| यथामरः | यथा (अव्ययः)–अमर (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| कं | चि | त्का | लं | स | ध | र्मा | त्मा |
| सी | त | या | ल | क्ष्म | णे | न | च |
| अ | न्वा | स्य | मा | नो | न्य | व | स |
| त्स्व | र्ग | लो | के | य | था | म | रः |