अन्वयः
पौर्णमास्याम् on a fullmoon night, तुषारमलिना faded by frost, ज्योत्स्ना moonlight, न राजते not shining, आतपश्यामा scorched by heat, सीतेव like Sita, लक्ष्यते appearing, न तु शोभते not bright.
Summary
On a fullmoon night the beams of the moon faded by forest look pale, dull like Sita scorched by the heat of the Sun.
पदच्छेदः
| ज्योत्स्ना | ज्योत्स्ना (१.१) |
| तुषारमलिना | तुषार–मलिन (१.१) |
| पौर्णमास्यां | पौर्णमासी (७.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| राजते | राजते (√राज् लट् प्र.पु. एक.) |
| सीतेव | सीता (१.१)–इव (अव्ययः) |
| चातपश्यामा | च (अव्ययः)–आतप–श्याम (१.१) |
| लक्ष्यते | लक्ष्यते (√लक्षय् प्र.पु. एक.) |
| न | न (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| शोभते | शोभते (√शुभ् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ज्यो | त्स्ना | तु | षा | र | म | लि | ना |
| पौ | र्ण | मा | स्यां | न | रा | ज | ते |
| सी | ते | व | चा | त | प | श्या | मा |
| ल | क्ष्य | ते | न | तु | शो | भ | ते |