स रामः पर्णशालायामासीनः सह सीतया ।
विरराज महाबाहुश्चित्रया चन्द्रमा इव ।
लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा चकार विविधाः कथाः ॥
स रामः पर्णशालायामासीनः सह सीतया ।
विरराज महाबाहुश्चित्रया चन्द्रमा इव ।
लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा चकार विविधाः कथाः ॥
अन्वयः
महर्षिभिः by ascetics, पूज्यमानः worshipped by, तत्र there, सुखितः peacefully, उवास stayed, भ्रात्रा brother, लक्ष्मणेन सह with Lakshmana, विविधाः diverse, कथाः talks, चकार making.M N Dutt
And honoured of the Maharsis, Rāma happily dwelt in that cottage; and seated with Sītā that mighty-armed one looked like the moon in conjunction with Citrā. And he carried on various converse with his brother Lakşınana.Summary
Honoured by the ascetics , Rama stayed there peacefully with brother Lakshmana, discussing diverse matters (from time to time).पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| रामः | राम (१.१) |
| पर्णशालायाम् | पर्ण–शाला (७.१) |
| आसीनः | आसीन (√आस् + क्त, १.१) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| सीतया | सीता (३.१) |
| विरराज | विरराज (√वि-राज् लिट् प्र.पु. एक.) |
| महाबाहुश् | महत्–बाहु (१.१) |
| चित्रया | चित्रा (३.१) |
| चन्द्रमा | चन्द्रमस् (१.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| लक्ष्मणेन | लक्ष्मण (३.१) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| भ्रात्रा | भ्रातृ (३.१) |
| चकार | चकार (√कृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| विविधाः | विविध (२.३) |
| कथाः | कथा (२.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | रा | मः | प | र्ण | शा | ला | या | मा | सी | नः | स |
| ह | सी | त | या | वि | र | रा | ज | म | हा | बा | हु |
| श्चि | त्र | या | च | न्द्र | मा | इ | व | ल | क्ष्म | णे | न |
| स | ह | भ्रा | त्रा | च | का | र | वि | वि | धाः | क | थाः |