ततस्तु सा राक्षससंघसंवृतं; खरं जनस्थानगतं विरूपिता ।
उपेत्य तं भ्रातरमुग्रतेजसं; पपात भूमौ गगनाद्यथाशनिः ॥
ततस्तु सा राक्षससंघसंवृतं; खरं जनस्थानगतं विरूपिता ।
उपेत्य तं भ्रातरमुग्रतेजसं; पपात भूमौ गगनाद्यथाशनिः ॥
अन्वयः
ततः after that, विरूपिता a disfigured woman, सा she, राक्षससङ्घसंवृतम् surrounded by demons, जनस्थानगतम् living in Janasthana, उग्रदर्शनम् fiercelooking, भ्रातरम् brother, तं खरम् to Khara, उपेत्य approaching, गगनात् from the sky, अशनिः thunderbolt, यथा like that, भूमौ on the ground, पपात fell down.M N Dutt
Then having been deformed, (the Rākşasī) approaching, her brother of fierce energy, Khara, come to Janasthāna, (seated surrounded by numbers of Raksasas), fell down to the earth, even as the thunderbolt bursts from the sky.Summary
A disfigured demoness, she fell down like the thunderbolt from the sky on the ground while her fiercelooking brother Khara sat surrounded by demons at Janasthana.पदच्छेदः
| ततस् | ततस् (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सा | तद् (१.१) |
| राक्षससंघसंवृतं | राक्षस–संघ–संवृत (√सम्-वृ + क्त, २.१) |
| खरं | खर (२.१) |
| जनस्थानगतं | जनस्थान–गत (√गम् + क्त, २.१) |
| विरूपिता | विरूपित (√वि-रूपय् + क्त, १.१) |
| उपेत्य | उपेत्य (√उप-इ + ल्यप्) |
| तं | तद् (२.१) |
| भ्रातरम् | भ्रातृ (२.१) |
| उग्रतेजसं | उग्र–तेजस् (२.१) |
| पपात | पपात (√पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| भूमौ | भूमि (७.१) |
| गगनाद् | गगन (५.१) |
| यथाशनिः | यथा (अव्ययः)–अशनि (१.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त | स्तु | सा | रा | क्ष | स | सं | घ | सं | वृ | तं |
| ख | रं | ज | न | स्था | न | ग | तं | वि | रू | पि | ता |
| उ | पे | त्य | तं | भ्रा | त | र | मु | ग्र | ते | ज | सं |
| प | पा | त | भू | मौ | ग | ग | ना | द्य | था | श | निः |
| ज | त | ज | र | ||||||||