३.१९.१२

संरक्तनयना घोरा रामं रक्तान्तलोचनम् ।
परुषा मधुराभाषं हृष्टादृष्टपराक्रमम् ॥

पदच्छेदः

संरक्तनयनासंरक्त (√सम्-रञ्ज् + क्त)–नयन (१.३)
घोराघोर (१.३)
रामंराम (२.१)
रक्तान्तलोचनम्रक्त–अन्त–लोचन (२.१)
परुषामधुराभाषंपरुष–अमधुर–आभाष (२.१)
हृष्टाहृष्ट (√हृष् + क्त, १.३)
दृष्टपराक्रमम्दृष्ट (√दृश् + क्त)–पराक्रम (२.१)

छन्दः

अनुष्टुप् [८]

छन्दोविश्लेषणम्

संक्त ना घो रा
रा मं क्तान्त लो नम्
रु षाधु रा भा षं
हृ ष्टा दृष्ट राक्र मम्